Politician Arun Jaitley Office Address, Contact, Phone Number, Email ID, Website

Politician Arun Jaitley is an Indian lawyer and politician that best known for her roles in Bharatiya Janata Party. He elected as Finance Minister, Minister of Corporate Affairs and Minister of Information and Broadcasting on 26th of May 2014 in BJP Government (under the Narendra Modi government). Under the Vajpayee government, Jaitley served in Commerce and Industry and Law and Justice. Arun Jaitley was born on 28th of December 1952 in New Delhi.

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Politician Arun Jaitley Contact Details

The all helpful information about Arun Jaitley is listed here with Arun Jaitley office address, office phone number, office email id. The people can also get information regarding Arun Jaitley official web page, Facebook, Twitter profile, etc.

Arun Jaitley Office Contact Details:

  • Address: Ministry of Finance, North Block, New Delhi-110001, India
  • Phone Numbers: +91 11 23092810, 23092510
  • Fax Number: +91 11 23092829
  • Email ID: ajaitley@sansad.nic.in
Arun Jaitley Residence Contact Details:
  • Permanent House Address: 42/B, Bansidhar Society, Jawahar Nagar, Vasna,Paldi, Ahmedabad 380007, Gujarat
  • N/A
  • Present Address: A-44, Kailash Colony, New Delhi
  • Phone: N/A
  • Email Id: N/A
Arun Jaitley Biography and Personal Information:

Politician Arun Jaitley

  • Arun Jaitley Birth Name: Arun Jaitley
  • Arun Jaitley Political Party: Bharatiya Janata Party
  • Arun Jaitley Date of Birth: Sunday, December 28, 1952
  • Arun Jaitley Birth Place: New Delhi
  • Arun Jaitley Mother’s Name: Shrimati Ratan Prabha Jaitley
  • Arun Jaitley Father’s Name: Maharaj Kishen Jaitley
  • Arun Jaitley Marital Status: Married
  • Arun Jaitley Education: Com. (Hons.), LL.B. Educated at Sri Ram College of Commerce, University of Delhi and Faculty of Law, University of Delhi
  • Arun Jaitley Awards: N/A
  • Arun Jaitley Religion: Hinduism
  • Arun Jaitley Spouse Name: Shrimati Sangeeta Jaitley
  • Arun Jaitley Children: Rohan Jaitley, Sonali Jaitley
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Arun Jaitley Official Website:

www.arunjaitley.com

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3 Comments

  1. Namaskar Mathaji
    i request appointment for Meet
    sub ; Save Manjeera River South India Kaali MAA Yedupayala Durgamma Temple,
    in telangana state Once famous temple in South India Yedupayala Vana Durgamma
    at Manjeera river , Yedupayala durgamma God is Saved our people Environment, reserve forest , it’s very danger position going on My state Government,
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    M L N Reddy
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    Telangana

  2. I have a humble request that plz save gangs . in Rishikesh. In street no 3 virbhadra road. Rishikesh at near gangs thear is illegal construction is going in . no boday . want to stop all people’s in Vikaspradhikaran. Took many and helping . plz stop . as soon as possible. And save maa ganga .

  3. सेवा में ,
    उमा भारती जी
    उत्तर प्रदेश

    विषय – डॉ सचिन माहुर और राजकुमार चहर (महारानी लक्ष्मी बाई मेडिकल कॉलेज , झाँसी ) इन दोनों ने मिल कर मेरा पैसे से शोषण और मेरा इलाज भी गलत कर दिया ।

    महोदय
    मेरा नाम मेहताब सिंह ,उम्र 53 साल है और पेशे से किसान हूँ, मैं गांव -पिंडोरी, जिला जालौन का रहने वाला । मैंने अर्थशास्त्र से एम.ए. की डिग्री भी हासिल की हुई है।
    महोदय, मैं यह बताना चाहता हूँ, की यह 2014 की बात है ,उससे पहले मैं चार-पांच सालों से तंबाकू का सेवन करता था। जिसकी वजह से मेरे मुख के बायें साइड में कैंसर नुमा घाव हो गया था। इसके लिए मैंने आस-पास के चिकित्सक को दिखाया, तो सभी ने आशंका जताई कि मेरे को मुंह का कैंसर है, जिसके तत्पश्चात मैंने टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल मुंबई दिखाने चला गया । वहां पर जा कर ,डॉक्टर से बात की तो उन्होंने कहा कि —आप को मुंह का कैंसर है ,और अच्छी बात ये है की बीमारी काफी छोटी है और इसका ऑपरेशन होने के बाद आप बिलकुल ठीक हो जाओगे । चूंकि, मेरा टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल काफी दूर था और मेरे साथ कोई और नही था तो मैं वहाँ से वापस घर चला आया। फिर मैंने झाँसी के डॉक्टर को दिखलाया तो सबने यही कहा की बीमारी ऑपरेशन के लायक है। पहले इसमें ऑपरेशन होगा उसके बाद ही कुछ किया जाएगा और यह बीमारी पूर्णतया ठीक होने की स्थिति में है क्योंकि बीमारी आपकी छोटी है ।
    पैसे की कमी के कारण मैंने मेडिकल कॉलेज में कैंसर विभाग के डॉक्टर सचिन माहुर साहब को दिखलाया । इन्होने ने हमारी बीमारी को देखा और उन्होंने कहा कि इस बीमारी का इलाज मैं कीमोथेरेपी और सिकाई (यानी रेडियोथैरेपी) से सही कर दूंगा। डूबते को तिनके का सहारा है, मैंने सोचा कि चलो ऑपरेशन से ज़ो मेरा चेहरा बिगड़ने वाला था उससे मैं बच जाऊंगा । उनके बातों में मुझे बहुत बड़ा विश्वास लगा और मैंने सिकाई / रेडियोथेरपि और कैंसर की दवाई लगाने की पूरी सहमति दे दी। यह बात मई के महीने 2014 की है , डॉ सचिन माहुर ने 25 सिकाई / रेडियोथेरपि और 6 कीमोथैरेपी(हर 21 दिन के अंतराल पर) डॉक्टर राजकुमार चाहर से कराई । डॉ सचिन माहुर ने अपने घर पर 25 सिकाई (रेडियोथेरपि) के लिए ₹30000/- लिए लेकिन उन्होंने मुझे कोई रसीद नहीं दिया, साथ में उन्होंने लगभग छह कीमोथैरेपी का मुझसे एक लाख (1,00,000-/) रुपया और ले लिया, । लेकिन उसका भी कोई रसीद उन्होंने नहीं दिया । उस समय सभी कैंसर मरीजों का इलाज जिनका डॉ सचिन माहुर करते थे उन सभी का रेडियोथेरपि का और केमोथेरेपी का पैसा वो अपने घर पर ही लिया करते थे लेकिन किसी को कोई रसीद नही मिलता था । मै इसका खुद गवाह हूँ, उन्होने हर मरीज से उनकी आर्थिक स्थिति के अनुसार 5000/- से लेकर 120000/- तक लिया करते थे । केमोथेरेपी के लिए वो मरीजों से घर पर पैसा लेते थे और घर पर ही कैंसर की दवाओं को पानी की बोतलें में डालकर मरीजों से दस हज़ार से बीस हज़ार तक लेकर , मरीजों को दे देते थे और कहते थे की आप रेडियोथेरपि विभाग में जाकर डॉ राजकुमार से लगवा लें।
    कीमोथैरेपी के लिए वो , हमें हमेशा मुझे घर पर बुलाते थे ,और कीमोथेरेपी की दवा वहीं पर दे दिया करते थे, मैं भी वहीं पर उनको पैसे दे दिया करता था, क्योंकि डॉक्टर भगवान के समान होता है इसलिए मैं इस पर कोई सवाल उठा नहीं सकता था और कैंसर के मरीज होने के कारण मैंने सोचा चलो कोई बात नहीं, पैसे तो आते-जाते रहते हैं पैसा आदमी कमा सकता है । इस तरह से सिकाई और कीमोथैरेपी में मेरा लगभग लगभग 1,30000 रुपया खर्चा हो गया 6 माह में। जिसका मुझे आज तक कोई रसीद नहीं दिया गया। रेडियोथेरेपी के दौरान मेरे मुंह में छाले वगैरह पड़े, काफी तकलीफ और कठिनाइयां भी हुई, जिसका अनुभव एक कैंसर का मरीज ही जान सकता है । लेकिन अच्छे होने की उम्मीद में मैंने इलाज अपना चालू रखा। रेडियोथेरेपी के बाद ही, मुझे और दवाई के साथ घर भेज दिया। मेरा इलाज लगभग-लगभग मई -2014 से लेकर के अक्टूबर -2014 तक किया गया। उसके बाद हमसे बोला कि आप ठीक हो जाएंगे घर चले जाइए। मैं घर चला गया और बीच- बीच में आकर कभी 15 दिन पर कभी एक महीने पर उनके घर आकर दिखा दिया करता था । घर पर और वह मुझे कुछ दवाइयां देते रहें उसका भी मुझे कोई रसीद भी नहीं देते थे, पर कैंसर का मरीज था ठीक होने की उम्मीद और उनपर विश्वास के कारण मैंने कभी भी उनसे रसीद के बारे में बात नही किया । वह सिर्फ सादे कागज पर दवाइयां लिख दे दिया करते थे। फिर इस तरह से कम से कम 8 से 9 महीने इलाज चलता रहा । इनके इलाज से मेरे मुंह में छाला कम तो हो गया परंतु कैंसर जो घाव था। वो कम तो हुआ था , लेकिन ठीक नहीं हुआ। फिर अखबारों और न्यूज़ चैनल के माध्यम पता चला की पता चला कि जून-जुलाई – 2015 में में इनको फर्जी एड्मिशन के सिलसिले में गुजरात की पुलिस गिरफ्तार करके ले कर चली गई है।
    काफी दिनों बाद मैं उनके घर पर गया तो पता चला की वो अभी 3 से 4 महीने के बाद ही मिलेंगे ,कैंसर के विभाग में भी गया तो उनका पता नहीं चला। फिर मैं कैंसर विभाग में ( नवंबर या दिसंबर- 2015 ) में आया तो, डॉक्टर राजकुमार चाहर भी नही दिखे और सारे नए स्टाफ मिले (पुराने स्टाफ लगभग-लगभग बदल दिए गए थे)। मैं देखा कि, एक नए डॉक्टर डॉ अंशु कुमार गोयल अपने चेंबर बैठे हुए हैं। मैं उनसे मिलने गया, अब मैंने पूरी बात बताई कि मेरा इलाज सिकाई और कीमोथेरेपी यहां पर हुआ है डॉक्टर सचिन माहुर के द्वारा और डॉक्टर राजकुमार ने हमारी सिकाई की थी है। तो उन्होने मेरे बीमारी को देखा– और कहा की आपके चेहरे को देख कर ऐसा लगता है आपकी रेडियोथेरेपी तो हुई है । फिर उन्होने ये बताया की क्या वाकई में आपकी रेडियोथेरेपी हुई है तो मैं तेजी से बोला – की हाँ यहीं पर हुई थी, और आपके विभाग के मशीन पर हुई थी । उन्होंने कहा कि ऐसा है कि यह रेडियोथेरेपी की जो मशीन है लगभग- लगभग 4-5 सालों से बंद है और इस मशीन से रेडियोथेरेपी तो हो ही नहीं सकती । तो मैंने कहा की साहब मैं ही नहीं , यहाँ पर कई मरीजों की रेडियोथेरेपी हुई है। तो उन्होंने इस बात का जबाब नही दिया, और सिर्फ मुस्करा दिया और फिर गंभीर होकर कहा कि, शायद आप की बीमारी खत्म नहीं हुई हैं , बेहतर होगा कि आप इसमें आगे और इलाज कराएं। तो मैंने इन से फिर बोला की अब मैं क्या करूं तो उन्होंने जवाब दिया कि आप सबसे अच्छा रहेगा कि आप PGI लखनऊ में चले जाएं और वहां पर जाकर ठीक से इलाज कराएं। क्योंकि यहां पर मशीनें बंद है और आपकी बीमारी में अब कीमोथेरेपी नहीं हो सकती इसमें ऑपरेशन की ही संभावना है । ये सब सुनकर मुझे काफी निराशा हुई । काफी निराश मन या यों कहें की मेरा अब इलाज करने का मन भी नही कर रहा था अब सोचा की अब तो मुझे कोई नही बचा सकता, अब तो मरना ही है , फिर अपने घर पर आया और मैंने ये सब बातें अपनी धर्म पत्नी को बताई तो उसने मेरी हिम्मत बड़ाई और कहा की हिम्मत मत हारो आगे की सोचो और अपना इलाज किसी अच्छे डॉक्टर से कराओ।
    इसके पश्चात में पीजीआई लखनऊ में गया, वहां पर हमने डॉक्टर पुनीता लाल को दिखाया उन्होंने पूरा मेरा मर्ज देखा और पूछा कि आप का इलाज क्या -क्या हुआ है, तो मैंने बताया कि डाक्टर साहब मेरा 6- केमोथेरेपी और और 25 रेडियोथेरेपी /सिकाई डॉक्टर सचिन माहुर के द्वारा झांसी मेडिकल कॉलेज में हुआ है ।उन्होंने कहा ठीक है आप ऐसा करिए कि , आपका जो भी इलाज हुआ है उसके बारे में पूरा विवरण आपने डॉक्टर के द्वारा लिखवा कर लाए । उन्होंने डॉ अंशु कुमार गोयल के नाम से पर्ची बना दी और कहा कि डॉ. अंशु से मिलिये वो यहाँ (पी जीआई –लखनऊ ) से ही गए हैं, आप जाइए उनसे मिलिये और अपनी बीमारी के जो भी इलाज हुआ उसका पूरा विवरण लेकर आए, तो उसके बाद में आपका आगे का इलाज कर सकती हूं, क्योंकि कैंसर का इलाज करने के लिए जो पिछला इलाज हुआ उसके बारे में बारे में पूरी जानकारी लेने के बाद ही, अच्छे से आगे का इलाज हो सकता है।
    तो मैं वह पर्चा (उनके द्वारा लिखा गया) लेकर मेडिकल कॉलेज झाँसी में , फिर डॉक्टर अंशु कुमार गोयल से मिला और उनको पर्चा दिखाया और बोला कि आप मेरे बीमारी में जो भी इलाज हुआ है ,उसको लिख कर दे दें तो डॉक्टर अंशु कुमार गोयल ने बोला कि ऐसा है कि मैंने आप का इलाज नहीं किया है , आप का इलाज 2014 में हुआ था और मेरी जॉइनिंग यहां पर 2015 में हुई है तो पिछले इलाज के बारे में, मुझे कैसे पता होगा की – आपका क्या इलाज हुआ है और न ही यहाँ पर आपके इलाज के बारे में कोई ऐसी रिकॉर्ड की व्यवस्था है। अतः बेहतर होगा कि आप अपने डॉक्टर से ही बात करें, और उनसे इलाज के बारे में पूरा विवरण लेकर PGI- लखनऊ चले जाएं ।इसके बाद मैं डॉक्टर सचिन माहुर के घर पर गया ,और उनसे अपने इलाज के विवरण के बारे में मांगा ।ताकि मुझे उल्लेख कर दें -कि मेरा सिकाई कितनी बार , किस मात्र में और कितनी डोज़ दिया है और कौन सा कीमोथैरेपी दिया गया है, तो उन्होंने पहले मेरी बीमारी को देखा और बोले की आप आपकी बीमारी अभी बची हुई है ,आप मुझसे 3 कीमो और लगवा ले ,तो आप की बीमारी पूरी तरह से सही हो जाएगी ,लेकिन फिर मैंने उनसे अपने इलाज का विवरण के बारे में लिखित मांगा तो, वह आनाकानी करने लगे ।
    उनके बातों से मुझे ऐसा लग रहा था कि मेरा इलाज कहीं ना कहीं गड़बड़ किया गया है , और वो कुछ भी लिखित देने को तैयार नही हैं वो बार बार मेरे से कह रहे थे की आप मुझसे इलाज कराओ। अब मुझे कुछ समझ में नही आ रहा था की आगे क्या करूँ । फिर मैं मायूस होकर अपने घर चला गया , अब मुझे कुछ समझ नही आ रहा था की अब मैं क्या करूँ । लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी और तीन चार दिन के बाद पैसे इकठ्ठा करने के बाद कैंसर विभाग में फिर आया और मैंने एक पत्र प्रिन्सिपल के नाम से लिखा और मांग किया की मेरे इलाज का विवरण दिया जाय, परंतु उसका जबाब अभी तक नही मिला। चुकीं बार – बार आने से और डॉ सचिन माहुर और राजकुमार द्वारा किए गए कई मरीजों से बात करके पता चला की उनका भी इलाज़ गलत किया गया साथ में ये भी पता चला की रेडियोथेरेपी /सिकाई की मशीन स्टाफ न होने के कारण नहीं चलाया जा रहा है । यह भी मुझे पता चला कि जब यहां सिकाई /रेडियोथेरपि की मशीन 6 सालों से बंद पड़ी है।
    फिर, मैं झांसी मेडिकल कॉलेज के कैंसर विभाग में डॉ अंशु गोयल से अपने बीमारी के इलाज के बारे में बात की तो उन्होंने फिर वही बात दोहराया की आप अपनी बीमारी का ऑपरेशन करा ले ,इसके अलावा और कोई इलाज नहीं है क्योंकि इस तरह की बीमारी में ऑपरेशन ही सबसे अच्छा इलाज होता है फिर मैंने सिकाई की मशीन के बारे में उनसे पूछताछ की कि क्या इस मशीन से और मरीजों की सिकाई /रेडियोथेरेपी होती है कि नहीं , तो उन्होंने कहा कि यहां मशीन सिकाई/ रेडियोथेरेपी की लगी है , वह लगभग पिछले 4 से 5 वर्षों से बंद पड़ी है क्योंकि इस मशीन को चलाने के लिए हमारे पास टेक्नीशियन और जरूरी चीजें उपलब्ध नहीं हैं।
    फिर मैंने कहा कि मेरी सिकाई /रेडियोथेरेपी इसी मशीन पर इसी विभाग में डॉक्टर सचिन माहौर के द्वारा किया गया है उस सिकाई/ रेडियोथेरेपी की मशीन को चलाने वाले डॉक्टर राजकुमार चाहर थे और मेरा इसी मशीन के द्वारा 2014 में 25 सिकाई हुई है, तो उन्होंने फिर कहा की मुझे पहले की स्थिति के बारे में पता नहीं लेकिन जो स्थिति अभी है उसके बारे में, मैं यही बता सकता हूं कि, यह मशीन 4 -5 सालों से बंद है और हम लोग मशीन इसलिए नहीं चला सकते क्योंकि इसके लिए इसको चलाने के लिए हमारे पास जरूरी स्टाफ नहीं है ।फिर मैंने उससे पूछा कि डॉक्टर राजकुमार चाहर आजकल विभाग में नहीं दिखाई दे रहे हैं तो उन्होंने कहा कि इस विभाग में कोई डॉक्टर राजकुमार चाहर नाम का डॉक्टर कभी नियुक्त ही नहीं हुआ है। तब मैं काफी परेशान हो गया ।
    फिर, मैं वहां से पीजीआई लखनऊ की तरफ रवाना हो गया और वहां पर जा कर के मैं डॉक्टर पुनीता लाल को सारी स्टोरी बताई, तो उन्होंने कहा कि मुझे इस से कोई मतलब नहीं है, अगर आप अपने इलाज में हुए सारे विवरण को मेरे को मेरे पास ला कर दें तो मैं आगे का इलाज कर सकती हूं। फिर मैंने वहां पर कार्यरत जूनियर डॉक्टरों से अनुरोध करके यह पता करने की कोशिश की सिकाई/ रेडियोथेरेपी की मशीन चलाने के लिए कौन-कौन से स्टाफ की जरूरत होती है, पहले तो उन्होंने इस मामले पर बात करने से मना कर दिया लेकिन मेरे बार बार निवेदन करने पर उन्होंने कहा कि झांसी मेडिकल कॉलेज में कोबाल्ट की मशीन लगी है और उसको चलाने के लिए एक डॉक्टर ,एक मेडिकल फिजिसिस्ट और मशीन को चलाने के लिए रेडियो थैरेपी टेक्निशन स्टाफ की जरूरत होती है अगर यह तीनों स्टाफ ना हो तो उस मशीन को नहीं चलाया जा सकता है ।अगर कोई व्यक्ति चलाता है तो वह गैर कानूनी कार्य करता है, क्योंकि सिकाई की मशीन से रेडिएशन निकलती है जो कि दो- धारी तलवार के समान होती है अगर उसका सदुपयोग किया जाए तो इलाज होता है और उसका सदुपयोग न किया जाए तो उससे मरीज को काफी नुकसान होता है मैंने उनके द्वारा समझाई गई बात को पूरी से नहीं समझ पाया। फिर मैंने उनसे कहा कि मुझे क्या उस मशीन को सिर्फ डॉक्टर चला सकता है तो उन्होंने कहा कि नहीं उस मशीन को चलाने के लिए तीनों स्टाफ का होना अति आवश्यक होता है जैसे डॉक्टर लिखता है कि इतना डोज़ radiation देना है मेडिकल फिजिसिस्ट का काम होता है कि मशीन के द्वारा उतना डोज़ ही मरीज को दिया जाए ना उससे कम किया जाय और ना उससे ज्यादा दिया जाए ।रेडियोथैरेपी टेक्निशन काम होता है कि उस मशीन को कितने सैकेंड तक उस मरीज के से सिकाई दी जाए ताकि वह डॉक्टर के द्वारा लिखा गया डोज वह मरीज को चला जाए। फिर मैंने उन से विनम्रता से अनुरोध किया की अगर कोई डॉक्टर बिना मेडिकल फिजिसिस्ट और स्टाफ के बिना मशीन चलाता है तो क्या वह गलत है कि सही है उनका साफ शब्दों में कहा , कि उस मशीन को चलाने के लिए तीनों स्टाफ का होना अति आवश्यक है। अगर उस मशीन को इन तीनों स्टाफ के ना होने के बावजूद मशीन चलाई जाती है तो उस मशीन को चलाना पूरी तरह से गैर कानूनी है। तो मैं इसके बाद मैंने उन से यह पूछा कि ,मेरा तो वहां पर सिकाई हुआ है तो क्या मेरी सिकाई /रेडियोथेरेपी गलत हुई है तो उस पर वह मुस्कुराने लगे और कुछ बोलने से मना कर दिया। फिर मैंने उनसे बहुत निवेदन किया तो उन्होंने कहा कि मैं आपसे फिर बोल रहा हूं कि अगर उस मशीन को तीनों स्टाफ नहीं है तो नहीं चलाया सकता अगर कोई भी चलाता है, वह पूर्णतया का गैरकानूनी है और अगर ऐसा हुआ है तो आप का इलाज भी पूर्णतया गलत हुआ है। इतना सुनने के बावजूद मैं काफी परेशान हो चुका था ,मैंने इतनी मेहनत थी कि मेरा इलाज हो ,लेकिन जब मेरा इलाज ही गलत हुआ तो मैं क्या कर सकता हूं।इसके बाद मैं काफी परेशान हो गया और मुझे इस बात का पूरी तरह से एहसास हो गया कि मेरी मेरा जो इलाज हुआ था वह गलत तरीके से सिर्फ पैसा कमाने के लिए किया गया था । अब मुझे स्पस्ट हो गया की डॉ सचिन माहुर ने मेरी सिकाई/ रेडियोथेरेपी गलत किया है, तभी वो किसी भी मरीज को कोई लिखित रसीद नहीं देते थे।
    क्योंकि शक के कई कारण थे, पहली बार जब मैंने उनसे एक डॉक्टर सचिन माहूर से इलाज के बारे में विवरण मांगा तो उनको बार-बार उस बात को आनाकानी करना और ना विवरण उपलब्ध कराना है, और ना ही मेरा इतना पैसा देने के बावजूद उन्होंने मेरे को किसी भी तरह का कोई रसीद या इलाज का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया। फिर मैं वहां से वापस झांसी मेडिकल कॉलेज में आ गया, और मैं यहां पर प्रिंसपल ऑफिस में क्लर्क से दोस्ती किया और उसे पता किया कि मशीन यह कब से बंद है काफी दिनों की मशक्कत करने के बाद मुझे मेरे पास यह जानकारी मिली कि उस रेडियोथेरपि की मशीन 6 से 7 साल से बंद है और उस मशीन को चलाने के लिए मेडिकल फिजिसिस्ट और टेक्नीशियन कि यहां पर पोस्ट तो है लेकिन इन दोनों की अभी तक पोस्टिंग ना होने के कारण उस मशीन को बंद कर दिया गया। अब मेरे मन में सवाल था कि डॉक्टर राजकुमार चाहर ने उस मशीन को चलाया कैसे तो काफी मशक्कत करने के बाद मुझे पता चला कि डॉक्टर राजकुमार चाहर डॉक्टर नहीं थे ,वह एक रेडियोथैरेपी टेक्नीशियन थे ।जिनको 2013 में फर्जी डिग्री के आधार पर ही ,यहां से हटा दिया गया था । (ये आरटीआई में भी उन्होने लिख कर दिया है -प्रतिलिपि संलग्न ) तब मैंने पता किया कि क्या सरकारी विभाग में ऐसा हो सकता है तो वहां पर कुछ लोगों से पता चला कि डॉक्टर सचिन माहुर इस तरह के कई धंधे करते हैं उनके बारे में न्यू -पेपर में यहां पर काफी कुछ छपा हुआ है लेकिन वह अपने धन बल और राजनैतिक संरक्षण के कारण यहां पर रुके हुए हैं और उनके खिलाफ कोई भी अधिकारी या गरीब मरीज कुछ भी नहीं बोल सकता है।
    जैसा कि हम सब जानते हैं कि बुंदेलखंड में अधिकांश तो गरीब किसान जो कि कम पढ़े-लिखे भोले-भाले होते हैं वह चिकित्सक को भगवान के समान ही मानते हैं, और चिकित्सक द्वारा किए गए इलाज को भी भगवान का आदेश मानकर ही करते है। उसको आप सोच समझ सकते हैं कि ऐसे डॉ सचिन माहुर और राजकुमार जैसे चिकित्सक जिनसे न जाने कितने ही कैंसर मरीजों का इलाज गलत तरीके से किया है और सिर्फ अपने फायदे के लिए, कितने सालों से कर रहे होंगे अगर आप यहां के और लोगों से भी पता करना चाहें तो आप आसानी से पता सकते हैं कि डॉ सचिन माहुर का यहां के लोगों में कितनी नाराजगी है,खास करके यहां के जो भी चिकित्सक गण भी हैं या ज़ो अपना प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं उनसे अगर आप बात करेंगे तो पता चल जाएगा कि डॉ सचिन माहुर सिर्फ पैसों के लिए कैंसर मरीजों का अत्यधिक शोषण करते हैं और वह अपनी कीमोथैरेपी की दवाइयां अपने घर से देते हैं और गलत विश्वास पैदा करके मरीजों को (जो कि भोले वाले और अनपढ़ होते हैं )उनको अपने जाल में फंसा करके उन से पैसा कमाने का एक तरह से व्यापार बना कर रखा है ।ऐसा नहीं कि यहां के प्रधानाचार्य को पता नहीं है उनको भी पता है ,लेकिन सब जानते हैं कि डॉक्टर सचिन अपने धन बल के बल और राजनैतिक संरक्षण पर ही इतने सालों तक इस मेडिकल कॉलेज झांसी में काफी शिकायते होने के वावजूद जमे हुए हैं।
    महोदय , मैं आपको यही बताना चाहता हूं कि डॉ सचिन माहुर गुजरात की जेल में दो महीने रहे फिर भी उनका आज तक कोई सस्पेंशन तक नही हुआ।
    महोदय झांसी मेडिकल कॉलेज से मेरा घर लगभग पंचानबे( 95 ) किलोमीटर की दूरी पर है और मुझे अपने घर से मेडिकल कॉलेज आने में लगभग 3 से 4 घंटे का समय, बार -बार बस बदलना पड़ता है तब जाकर मैं मेडिकल कॉलेज झांसी पहुंच पाता हूं इसी बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं कि जो भी जानकारी मैंने यहां पर इकट्ठा किया इस मेडिकल कॉलेज के कैंसर विभाग के बारे में या मशीन के बारे में, या डॉक्टर सचिन माहुर और राजकुमार के बारे में उसके लिए मुझे काफी मेहनत, काफी पैसा, काफी कठिनाइयो का सामना करना पड़ा है। मैं उसका वर्णन शब्दों में नहीं कर सकता हूं । ( ये सब जानकारी मैंने लगभग दो सालों मे मैंने पता किया है)।
    मैं एक कैंसर का मरीज हूं मुझे अच्छी तरह से पता है आज या तो कल मैं इस दुनिया को छोड़ कर चला जाऊंगा लेकिन फिर भी ये लड़ाई मैंने अपने और उन सब गरीब भोले – भाले मरीजों को लेकर अभी तक लड़ रहा हूँ जिनका इलाज डॉक्टर सचिन माहुर और राजकुमार चाहर के द्वारा किया गया है और वो सब अब इस दुनिया में नहीं हैं।
    लेकिन मैं ही मैं यह बात और कहना चाहता हूं की कैंसर मरीज को सिर्फ एक कमाने का सिर्फ एक कमाने का जरिया बनाना कितनी गलत बात है ,यह मानवता के नाम पर कलंक है एक चिकित्सक जो हमारे बीमारी का इलाज करता है हम उसको ही भगवान के समान मानते हैं और सब कुछ उसके कहने पर ही करते हैं ,मैं यह नहीं कह रहा हूं कि डॉक्टर सचिन माहुर ने मेरे साथ क्या किया- क्या नहीं किया है। लेकिन इस सच्चाई जब मेरे सामने आई, कि मेरा इलाज गलत किया है तो मेरे को कितना मानसिक कष्ट पहुंचा होगा ।मेरे विश्वास को कितना बड़ा ठेस पहुंचा होगा। यह शायद एक कैंसर मरीज ही समझ सकता है । उस को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता है।
    मैंने ऊपर उपरोक्त बातें जो भी लिखी है वह सत प्रतिशत सही है जैसे की एक मरता हुआ व्यक्ति झूठ नहीं हो सकता वैसे ही, मैं जानता हूं कि मैं कैंसर के मरीज हूं और कल हो सकता है- रहूं या ना रहूं तो, मैं झूठ तो नहीं बोल सकता।
    मैं यह नहीं कहता हूं कि उन पर कोई कार्रवाई हो या ऐसा कुछ हो लेकिन मैं जानना चाहता हूं कि जब एक गरीब गांव का मरीज कैंसर का मरीज जाता है और डॉक्टर सचिन माहुर और राजकुमार के जाल में फंस जाता तो उसका क्या होता है। मुझे अच्छी तरह से पता है कि जब मेरा इलाज चल रहा था तो उस समय काफी गांव के गरीब मरीज थे और डॉक्टर सचिन माहुर साहब अपने घर पर सारे मरीजों को शाम को बुलाकर के कीमोथैरेपी की दवाइयां देते थे और उन से पैसा नगद में लिया करते थे, उस मरीजों का सिर्फ विश्वास ही था इसी कारण वह अपने डॉक्टर से किसी भी तरह का कोई रसीद नहीं मांगा करते थे ।उनको यह उम्मीद थी किस किसी भी तरह उनका भला हो जाएगा या उस सिकाई /रेडियोथेरेपी से उनका भला हो जाएगा। लेकिन डॉक्टर सचिन माहुर और राजकुमार चाहर इसको पूरी तरह से से व्यवसाय बना लिया था।
    मैं इतनी मेहनत करके जो भी जानकारी कट्ठा कर पाया हूं (मैंने लगभग दो सालों मे) सोचिए उन गरीब मरीजों के बारे में जो पड़े –लिखे भी नहीं है उनके साथ क्या हुआ होगा कितने मरीज को जिनको मैं जानता हूं या जिनका सिकाई/ रेडियोथेरेपी मेरे साथ हो रही थी वह तो अब इस दुनिया में है भी नहीं ।
    मुझे सरकार के साथ कोई गिला शिकवा नहीं है लेकिन इस समाज में इस तरह से चिकित्सक और साथ में इस सरकारी मेडिकल कॉलेज में इस तरह से चिकित्सक काम करेंगे तो सोचिए समाज में इन जैसे चिकित्सक के ही कारण और चिकित्सक भी बदनाम हो रहे हैं , डॉक्टर बहुत नोबल प्रोफेशन माना जाता है, और माना जाता रहेगा । किसी को इस बात से किसी का इंकार नहीं होगा। यह मुझे अच्छी तरह से पता है ,लेकिन अगर जैसे कि एक गंदी मछली पूरे तालाब को गंदा कर सकती है वैसे ही ऐसे चिकित्सक के कारण पूरे चिकित्सक गण का इंप्रेशन समाज में खराब होता है ।

    अतः महोदय , मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि निम्नलिखी बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए उनपर आप एक पी जी आई के डॉक्टर या लखनऊ के डॉक्टर द्वारा कमिटी बना कर और उनसे जांच कराकर उचित कार्यवाही करें, ताकि आगे से और कैंसर गरीब मरीजों का शोषण और गलत इलाज़ डॉ सचिन माहुर और राजकुमार चाहर जैसे भ्रष्ट , इंसानियत के दुश्मन , लालची और धोखेबाज़ लोगों से न हो।
    1. मेरा इलाज में कौन सा कीमोथेरेपी और कौन से सिकाई कितनी डोज़ में दी गई है और क्यों दी गयी ।
    2. बुंदेलखंड के गरीब भोले भले , कैंसर मरीजो को ध्यान मे रखते हुए यह पता किया जाए कि सिकाई मशीन (radiation machine) अगर बंद है उन्होंने क्यों चलाया गया । जब उनको यह बात पता थी को रेडियोथेरपि मशीन बंद है, तो उसको उन्होंने किसकी आदेश पर चलाया गया ।
    3. राजकुमार चाहर फर्जी डॉक्टर बन कर के वहां के मरीजों को कीमोथेरेपी और रेडियोथैरेपी देते थे, उन पर कार्रवाई किया जाए । और राजकुमार ने किसके आदेश पर केमोथेरेपी और रेडियोथेरपि मरीजों को देते थे ।
    4. राजकुमार चाहर ज़ो रेडियो थैरेपी टेक्नीशियन वहां पर थे जिनको पहले हटा दिया गया है, वह किसकी आदेश पर को मशीन चला कर के मरीजों का सिकाई किया करते थे वह हमको कई बार कीमोथैरेपी भी लगाया है। अतः तो मैं जानना चाहता हूं कि राज कुमार चाहर किसके आदेश पर कीमोथैरेपी जैसी महंगी दवाइयां ( जो की एक सिर्फ एक्सपेर्ट डॉक्टर ही लगा सकता है) लगाते थे ।
    5. मैं यह भी जानना चाहता हूं कि मेरे बीमारी के इलाज में कहां तक लापरवाही हुई है
    6. मुझसे आपसे यह भी अनुरोध है कि मेरे बार बार प्रार्थना पत्र पर देने पर भी मेरे इलाज में हुए कीमोथेरेपी और रेडियो थेरेपी के बारे में विवरण क्यों नहीं दिया गया।
    7. मैंने इस संबंध में आरटीआई भी दिया था परंतु डॉ सचिन माहुर और राजकुमार ने आरटीआई के लिए मुझे धमकी भी दिया था । उस संबंध में मैंने प्रधानाचार्य को प्रार्थना पत्र भी दिया था उस पर भी कोई कार्यवाही नही हुई।
    8. डॉ सचिन माहुर को जब दो महीने गुजरात की जेल में रहने के बावजूद बिना निलंबन किए उनको जनहित को देखते हुए जॉइन करा दिया गया और उनपर अभी तक कोई कार्यवाही तक नहीं हुई।

    धन्यवाद
    प्रार्थी-
    मेहताब सिंह
    ग्राम –और पोस्ट – पिंडारी , जिला- जालौन
    मोबाइल नंबर- 9415924846

    मैंने ज़ो भी अपने इलाज के बारें में और डॉ सचिन माहुर और राजकुमार के बारें में जो ज़रूरी दस्तावेज हैं उनको इसके साथ में संगलित कर रहा हूँ।
    महोदय , आपको यह भी बताना चाहता हूँ की मैंने अपने इलाज़ , राजकुमार चाहर और डॉ सचिन के बारे में पुख्ता और लिखित जानकारी के लिए ज़न सूचना भी चिकित्सा महानिदेशक के यहा अप्रैल के महीने में डाली थी ,लेकिन अभी तक उसका जबाब तो नही मिला लेकिन मुझे और मेरे परिवार को धमकियाँ मिलनी शुरू हो गयी हैं । कहते हैं की इस आर । टी । आई । से कुछ नहीं होने वाला है जब तक तुम को जबाब मिलेगा इस दुनिया में तुम कैंसर से ही मर जावोगे ।साहब मुझे बस न्याय चाहिए । मैं तो तिल तिल कर मर रहा हूँ ।

    बस आप न्याय दिला दे दीजिये । हो सकता है जब तक मेरी आवाज आप तक पहुंचे तब तक मैं इस दुनिया मे ना रहूँ।

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